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उज्जैन | देश की सीमा पर अपना खून-पसीना बहाने वाले सैनिकों की दिनचर्या और उनकी गतिविधियों से रूबरू होने के लिए शहर की जांबाज युवती ममता सांगते अपनी अन्य 65 युवतियां के साथ हर साल रक्षाबंधन के दिन बॉर्डर पर जाती हैं। बीएसएफ के जवानों की कलाई पर इन्होंने उस समय राखी बांधी, जब वहां गोलीबारी चल रही थी। बहुत मशक्कत के बाद वे बॉर्डर तक पहुंच पाई थीं। सैनिकों को इस बात का पता ही नहीं था कि आज राखी है, जब उन्होंने राखी बंधवाई तो कहा कि आप इतने खतरे में भी हमें राखी बांधने आई हैं।
महाकाल की तस्वीर और शिप्रा का जल भी ले गई थीं साथ
सीमा पर जाने वाली ये युवतियां अपने साथ बाबा महाकाल की तस्वीर, तिरंगा और पतित पावनी मां शिप्रा का जल भी ले गई थीं। जब बॉर्डर पर गोलीबारी हो रही थी, तो इन्हें वहां तक पहुंचने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा था। ममता सांगते ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के आरसपुरा सेक्टर की सुचेतगढ़ सीमा पर जवान देश की रक्षा के लिए गोलियां झेल रहे थे। महाकाल की तस्वीर देख, सभी खुश हो गए।
दल के रवाना होने से पहले किया था सम्मान
भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सैनिकों की गतिविधियों को जानने के लिए उज्जैन संभाग से करीब 72 सदस्यों का दल पिछले वर्ष अगस्त माह में रवाना हुआ था। रवाना होने से पहले दल का सम्मान समारोह आयोजित किया गया था, जिसमें दल के प्रभारी को सीमा पर फहराने के लिए तिरंगा भेंट किया गया था।
बाडमेर सीमा पर भी गई थीं युवतियां
जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी रीना चौहान के अनुसार मुख्यमंत्री द्वारा चलाई गई मां तुझे प्रणाम योजना के तहत भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा राजस्थान के बाडमेर के लिए रवाना हुए इस दल में नीमच, रतलाम, मंदसौर, देवास की 65 युवतियां शामिल थीं। दल के रवाना होने से पूर्व पुलिस सामुदायिक भवन में सम्मान समारोह आयोजित किया गया था।